सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजु -ए-कातिल में है। रहरवे – राहे – मुहब्बत रह न जाये राह में, लज्जते – सहरानवर्दी, दूरिए – मंिजल में है। वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमाँ, हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है। ऐ शहीदे – मुल्के -मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार, अब तेरी हिम्मत का चर्चा गैर की महफिलमें है।
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